Mamleshwar Jyotirlinga

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संसार में कुल 12 ज्योतिर्लिंग है। इसमें से ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग सबसे विशेष है | शिव पुराणोक्त द्वादश ज्योतिर्लिंग स्त्रोत की इस श्लोक अनुसार 12 ज्योतिर्लिंग के नाम व उन सभी को अपने-अपने स्थान क्षेत्र के नाम से जाना जाता है।

सौराष्ट्रे सोमनाथंच श्री शैले मल्लिकार्जुनम् |

उज्जयिन्यां महाकालमोंकारममलेश्वरम् ||

इस श्लोक में ओम्कारेश्वर क्षेत्र में ममलेश्वर (mamleshwar) को ज्योतिर्लिंग बताया गया हे | ओमकारेश्वर एवं ममलेश्वर दोनों एक ही ज्योतिर्लिंग के स्वरूप है नर्मदा के दक्षिण तट पर ममलेश्वर तथा उत्तर की ओर ओम्कारेश्वर ओमकार पर्वत पर विराजमान है और बीच में मां नर्मदा विराजमान है।

नर्मदा के एक और ओंकारेश्वर मंदिर है तो दूसरी और ममलेश्वर। पिता का पुत्री पर विशेष स्नेह होता इसी लिए तो साक्षात ओंकारेश्वर और ममलेश्वर माँ नर्मदा के दोनों किनारो पर विराजमान है। ओंकारेश्वर शिव की आत्मा है तो ममलेश्वर शिव का शरीर इन दोनों को मिलकर एक ज्योतिर्लिंग की मान्यता पूर्ण होती है। ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग का सही नाम अमरेश्वर मंदिर है।

कथा


पर्वतराज विंध्य ने समस्त पर्वतो से श्रेष्ट बनाने के लिए भगवन शिव की कठोर तपस्या को देखकर देवताओं और ऋषियों ने भगवान शिव से प्रार्थना की थी कि वे विंध्य क्षेत्र में स्थिर होकर निवास करें। भगवान शिवजी ने बात मान ली, वहां स्थित एक ही ओंकारलिंग दो स्वरूपों में विभक्त हो गया। प्रणव के अंतर्गत जो सदाशिव विद्यमान हुए, उन्हें ओंकार नाम से जाना जाता है। इसी प्रकार से पार्थिवमूर्ति में जो ज्योति प्रतिष्ठित हुई थी, उसे ही परमेश्वर अथवा अमलेश्वर ज्योतिर्लिंग कहते हैं।

ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर (Mamleshwar jyorlinga temple)


यह मंदिर भी पाँच मंजिला मंदिर है हर मंजिल पर शिवालय है | इस मंदिर प्रांगण में छह मंदिर और भी हैं | पत्थर के बेहतरीन कम वाला यह मंदिर अब पुरातत्व के अधीन है | देवी अहिल्या बाई के समय से यहाँ शिव पार्थिव पूजन होता रहा है ।माँ नर्मदा के दक्षिण तट पर स्थित ममलेश्वर महादेव मंदिर जो कि गगनचुंबी ध्वजा के साथ स्थित हैं। जिसकी ध्वजा निरंतर लहराती रहती हैं। इस मंदिर परिसर में क्ई मंदिर है। यह सभी मंदिर केंद्रीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में सुरक्षित हैं।

गर्भगृह


ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भगवान ममलेश्वर के गर्भगृह के बाहरी भाग वाले कक्ष में उत्तर और दक्षिणी दिवारो पर क्ई मंत्र उल्लेखीत है। जिन्हे देखने पर लगता है इन मंत्रो को किस प्रकार उकेरा गया होगा |सभी शब्दो भाग समान रूप से और स्पष्ट और सुंदरता से उकेरा गया है। हम पेपर पर भी इतने सुंदर और समान संरचना वाले शब्दो को नहीं लिख सकते जो इन पाषाण दिवारो पर उकेरा गया है। वास्तविक रूप से यह हमारे लिए कोई रहस्य से कम नहीं है। मंदिर में क्ई लोग आते जाते हैं परंतु कुछ ही लोगो कि नजर इन शिलालेखो पर जाती हैं। आखीर क्या लिखा है। इन शिलालेखो में यह भी विस्मयकारी प्रश्न हैं।
इन प्रश्नों का उत्तर में हमे महिम्न मंत्र मिला और ऊ नमःशिवाय तो इन शिलालेख पर पढते भी आये है। इन शिलालेख को 1063 ईश्वी में उकेरा गया था। इन सुंदर संरचना में महिम्न मंत्र के साथ माँ नर्मदा स्तुति और हलायुध्द स्त्रोत्र और शिव पार्वती स्तुति हैं।

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Worship to do at Mamleshwar Jyotirlinga


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